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सफेद मूसली की खेती कब और कैसे करें | Safed Musli Farming in Hindi

सफेद मूसली एक औषधि खेती है। जिसकी खेती करके किसान अच्छा पैसा कमा सकते हैं। सफेद मूसली एक औषधि खेती है। इस औषधि से शरीर की कई बीमारियां दूर की जाती है। जिसके कारण इसका बाजार में हमेशा मांग रहता है। यह फसल गर्म और सम-शीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में पैदा किया जा सकता है। खास बात यह है कि बारिश के समय यह फसल की जाती है।

सफेद मूसली की खेती में जबरदस्त कमाई को देखते लगातार किसान इसकी खेती कर रहे हैं। मूसली की खेती लगभग 6 से 8 महीने में तैयार हो जाती है। इसके पौधे की ऊंचाई लगभग 40 से 50 सेंटीमीटर होती है। इसकी जड़ें जमीन के अंदर 8 से 10 सेंटीमीटर लंबी होती है। प्राकृतिक तरीके से सफेद मुसली की खेती करके किसान भाई अच्छा कमाई कर रहे हैं। यदि आप भी सफेद मुसली की खेती (Safed Musli Farming) करना चाहते हैं। तो इसके बारे में पूरी जानकारी दी गई है। हमारे साथ बने रहे है।

(कैसे करें) सफ़ेद मूसली की खेती (White Musli Harvest)

सफेद मूसली एक औषधि पौधा है। औषधि के रूप में इसका उपयोग किया जाता है। सफेद मूसली के फल जमीन के अंदर उगते हैं तथा ऊपर निकलने वाले फूलों से बीज को बनाकर उन्हें भी बेचकर लोग कमाई करते हैं। किंतु फूलों के पकने तक फसल प्रभावित होती है। इसीलिए किसान भाई जल्द ही फसल को निकाल लेते हैं।

सफेद मूसली एक शक्तिवर्धक औषधि है। इसका कई रोगों में उपयोग किया जाता है जैसे- खांसी, अस्थमा, नपुंसकता, चर्म रोग, पीलिया, आदि के उपचार में लाया जाता है। जिसके कारण बाजार में इसकी कीमत 700 से 800 रुपये प्रति किलो तक मिलता है।

(उपयुक्त मिट्टी) सफ़ेद मूसली खेती के लिए (Suitable Soil)

इसकी खेती लाल और काली चिकनी मिट्टी में आसानी से पैदा किया जा सकता है। किंतु किसान भाई इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि खेत का पीएच मान 7.5 से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर 7 से अधिक है तो उसमें क्षारीय गुण पाया जाता है। जिसकी वजह से फसल की पैदावार पर सीधा असर देकने को मिलेगा। सफ़ेद मूसली की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छा माना गया है।
उस खेत का चयन करें जहां पर जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। क्योंकि जल भराव से फसल खराब होने का खतरा बना रहता है। और पैदावार पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार की फसल की खेती करने के लिए आपको एक खास जगह का चयन करना चाहिए। जिससे अच्छी पैदावार मिल सके। पथरीली भूमि वाली जगहों पर पैदावार नहीं हो पाता है। इसलिए खेती करने से पहले सही खेत का चयन करना बहुत जुरुरुी है।

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( जलवायु एवं तापमान ) सफ़ेद मूसली की खेती के लिए

इसकी खेती गर्म और सम-शीतोष्ण जलवायु मे किया जाता है। भारत में उत्तर प्रेदश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तरांचल, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, जैसे राज्यों के ऊपरी क्षेत्रों में इसको आसानी से उगाया जाता है। सफ़ेद मूसली की खेती बारिश के मौसम में की जाती है। उस समय तापमान सामान्य रहता है।

( किस्मे ) सफ़ेद मूसली खेती के लिए (White Muesli Varieties)

भारत में सफेद मूसली की कई किस्मे पाई जाती है। इसको 4 वर्ग में बांटा गया है। जिसमें क्लोरोफाइटम टयूवरोजम, क्लोरोफाइटम एटेनुएटम, क्लोरोफाइटम बोरिमिलियनम और क्लोरोफाइटम वोरिविलिएनम यह प्रमुख प्रजातियां हैं। इसके अतिरिक्त कई ऐसी प्रजातियां हैं जिसमें क्लोरोफाइटम अरुन्डीशियम, क्लोरोफाइटम लक्ष्म और क्लोरोफाइटम लेक्सम किस्मे भी शामिल है।

वहीं अगर इसमें बात किया जाए क्लोरोफाइटम टयूवरोजम और क्लोरोफाइटम वोरिविलिएनम तो इनमे भी कई किस्मे होती है। भारत देश में सबसे ज्यादा एम सी बी -405, MCB – 412, MCT -405, MDB13 किस्मो को उगाया जाता है।

( जुताई का सही समय ) सफ़ेद मूसली खेती के लिए

सफेद मुसली की खेती करने के लिए किसान भाइयों को रोटावेटर से तीन से चार बार जुताई करनी चाहिए। उसके बाद कुछ दिनों के लिए खेत को छोड़ देना चाहिए। उसमें जैविक खाद या पुरानी गोबर की खाद डालने के बाद पुनः एक बार जुताई करनी चाहिए। जिससे खाद पुरी तरह से खेत मे मिल सके।

सफ़ेद मूसली के बीज की बुवाई तरीका (Sowing Seeds)

सफेद मुसली की खेती बारिश के मौसम में की जाती है। क्योंकि बारिश के समय ही पौधे अच्छे से बढते है। सफेद मूसली के बीजों को रोपाई करने के लिए 4 से 5 क्विंटल बीज प्रति एकड़ के हिसाब से लगता है। रोपाई करने से पहले बीज को गोमूत्र में 2 घंटे पहले भिगोकर रखना चाहिए। इसके बाद खेत में उसे लगाना चाहिए। इसके बीजो की रोपाई में 2 लाइनों के बीच में तक़रीबन 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए तथा लगाए जा रहे बीजो के बीच में 8 से 10 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए। रोपाई करते समय इस बात का ध्यान रखें की गुच्छो मे 2 या 3 फिंगर जरुर हो।

सिंचाई और उवर्रक

इसकी खेती करने के लिए अधिक मात्रा में उर्वरक की जरूरत नहीं होती है। अधिक मात्रा में उर्वरक उपयोग करने से फसल की गुणवत्ता मे प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण बाजार में इसकी कीमत कम मिलती है। इसीलिए इसमें केवल गोबर की खाद और जैविक की खाद का ही ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। खेती में बीजों को लगाने के बाद ही सिंचाई कर देना चाहिए। बारिश के मौसम में सिंचाई की ज्यादा जरुर नही पड़ती है। अगर जरूरत हो तभी सिंचाई करें, नहीं तो नहीं करें।

सफ़ेद मूसली खेती मे लगने वाले रोग (Crop Disease)

सफेद मूसली के पौधे में बहुत कम रोग लगते है। कभी-कभी इसमें कवक और फफूंद जैसे रोग लग जाते हैं। इस रोग से बचने के लिए हमें केवल खरपतवार का सही से नियंत्रण करना होता है। अगर खेत मे खरपतवार का नियंत्रण कर लेंगे तो यह रोग लगने की संभावना नहीं रहती है। अगर फिर भी फसल में रोग लग गया है। तो इसके लिए आप बायोपैकूनील या बायोधन दवाई का छिड़काव कर सकते हैं। गोबर की खाद में 3 किलो ट्राईकोडर्मा का भी छिड़काव करें।

सफ़ेद मूसली फसल की खुदाई का सही समय

सफेद मुसली की फसल नवंबर महीने में खुदाई के लिए लगभग तैयार हो जाती है। लेकिन खुदाई करने से पहले हमें यह देख लेना चाहिए कि फसल तैयार है या नहीं। जिसकी पहचान पौधों को देखकर भी, की जा सकती है। फसल के तैयार हो जाने पर पौधे की पत्तियां पीले रंग की हो जाती है। जड़ों का रंग भी हल्का भूरा हो जाता है।

खुदाई करने से पहले एक बार खेत में पानी डाले जिससे खुदाई करने समय मूसली की जड़े टुटेना आसानी से बाहर निकल जाये। फसल के तैयार होने के बाद 3 महीने तक आप की खुदाई कर सकते हैं। तब तक इसकी जड़े बिल्कुल सूख जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इसके जड़ो से बीज भी तैयार हो जाते हैं।

सफ़ेद मूसली की पैदावार और कमाई

सफेद मुसली की खेती सही तरीके से करने पर एक हेक्टेयर में लगभग 10 से 12 क्विंटल तक पैदावार होती है। सूखने के बाद मूसली की पैदावार लगभग 4 से 5 क्विंटल तक रह जाती है। अगर इसकी बाजार में कीमत की बात किया जाए तो 600 से 700 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है। सफेद मुसली फसल से किसान 4 से 5 लाख तक की कमाई आराम से कर सकते हैं।

FAQ :

Q : सफेद मूसली की खेती कब और कैसे करें?

Ans : सफेद मूसली एक औषधि पौधा है। औषधि के रूप में इसका उपयोग किया जाता है। सफेद मूसली के फल जमीन के अंदर उगते हैं तथा ऊपर निकलने वाले फूलों से बीज को बनाकर उन्हें भी बेचकर लोग कमाई करते हैं।

Q : सफेद मूसली 1 बीघा में कितनी होती है?

Ans : सफेद मूसली की खेती एक बीघा जमीन में लगभग 10 से 12 क्विंटल तक पैदावार होती है।

Q : सफेद मूसली का कितने रुपए किलो बिकता है?

Ans : अगर इसकी बाजार में कीमत की बात किया जाए तो 600 से 700 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है।

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